⭐ *मुस्कान हत्याकांड (मुंडावर) में अध्यक्ष छैल बिहारी किराड़ का अद्वितीय योगदान*
— सच्चा समाज का सिपाही क्यों कहे जाते हैं छैल बिहारी किराड़?
मुस्कान हत्याकांड जैसी दिल दहला देने वाली घटना को पूरे प्रदेश में मुद्दा बनाने, प्रशासन को झकझोरने और समाज को एकजुट करने में छैल बिहारी किराड़ (अध्यक्ष, खटीक समाज अलवर) की भूमिका सबसे निर्णायक रही है।
उनका नेतृत्व, साहस और दृढ़ता इस पूरे आंदोलन की रीढ़ बनकर उभरे।
🔥 1. सबसे पहले आवाज उठाई — मामले को दबने नहीं दिया
घटना सामने आते ही छैल बिहारी किराड़ ने
पूरी घटना को फौरन जन-जन तक पहुँचाया,
समाज के नेताओं, युवाओं और संगठनों को सक्रिय किया,
और यह सुनिश्चित किया कि मामला किसी भी स्तर पर दब न पाए।
इन्हीं की पहल से यह केस स्थानीय नहीं, बल्कि जिला—क्षेत्र—राज्य स्तर का बड़ा मुद्दा बन गया।
🤝 2. पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहे
हत्या के बाद परिवार मानसिक रूप से टूट चुका था।
छैल बिहारी किराड़ ने
घर पहुंचकर परिवार को ढांढस दिया,
ज़रूरतें समझीं,
और प्रशासनिक दबाव बढ़ाने में परिवार को हर कदम पर साथ दिया।
उनकी मौजूदगी पीड़ित परिवार के लिए सबसे बड़ा साहस बनी।
📢 3. जन-आंदोलन की जमीन तैयार की
उन्होंने मुस्कान हत्याकांड को सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि
“समाज की बेटियों की सुरक्षा का प्रश्न” बताया।
छैल बिहारी किराड़ ने
विभिन्न समुदायों को एकजुट किया,
सोशल मीडिया पर जन-जागरण अभियान चलाया,
युवाओं को संगठित कर शांतिपूर्ण परंतु प्रभावी आंदोलन तैयार किया।
👮♂️ 4. पुलिस-प्रशासन को कठोर कार्रवाई के लिए मजबूर किया
छैल बिहारी किराड़ ने खुले मंच से प्रशासन से सवाल पूछे:
थाने के सामने ऐसी घटना कैसे?
सुरक्षा की चूक किसकी?
आरोपी का पूरा गैंग कौन?
SC/ST Act की सहायता क्यों नहीं?
उनके नेतृत्व के दबाव ने पुलिस को सक्रिय किया और जांच में तेजी आई।
📰 5. मीडिया में मुद्दा स्थापित कराने में अहम भूमिका
उनकी विश्वसनीयता और नेतृत्व के कारण
यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राज्य भर के मीडिया तक पहुँचा।
मीडिया रिपोर्टिंग ने केस को और अधिक मजबूत बनाया।
🚨 6. आरोपी की पुनः पुलिस परेड भी इन्हीं के दबाव का परिणाम
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब
छैल बिहारी किराड़ और समाज ने पहली परेड पर आपत्ति जताते हुए पुनः परेड कराने की मांग उठाई।
👉 इसी मांग और आंदोलन के दबाव में
आज मुख्य आरोपी उपेंद्र की
मुंडावर बाजार में दुबारा पुलिस परेड कराई गई —
भारी पुलिस जाप्ते और अधिकारियों की मौजूदगी में।
इस कदम का उद्देश्य था —
अपराधियों में भय पैदा करना,
आमजन में कानून-व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाना,
और यह संदेश देना कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं होंगे।
यह उपलब्धि समाज के आंदोलन और छैल बिहारी किराड़ की लगातार वकालत का सीधा परिणाम है।
🏛️ 7. न्यायिक प्रक्रिया पर लगातार नज़र
छैल जी की सक्रियता के चलते
आरोपी को SDM कोर्ट में रिमांड,
फिर विशेष SC/ST कोर्ट में पेशी,
और अब न्यायिक अभिरक्षा तक की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रही।
वे हर कदम पर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जांच में कोताही न हो।
✊ 8. सर्व समाज को जोड़कर बड़ा जन-संदेश दिया
“ये सिर्फ मुस्कान का नहीं, हर बेटी की सुरक्षा का सवाल है।”
इस संदेश ने आंदोलन को नई ताकत दी।
आज अलवर ही नहीं, आसपास के जिलों से लोग पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं —
इस एकजुटता के केंद्र में छैल बिहारी किराड़ का नेतृत्व है।
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⭐ सार: क्यों ज़रूरी हैं छैल बिहारी किराड़ समाज के लिए?
क्षेत्र योगदान
जन-जागरण घटना को छिपने नहीं दिया, पूरे प्रदेश में आवाज पहुँचाई
नेतृत्व विभिन्न समाजों को जोड़कर बड़ा और शांतिपूर्ण जन-आंदोलन खड़ा किया
पीड़ित परिवार मानसिक, सामाजिक और हर कदम पर मजबूत समर्थन
प्रशासनिक दबाव पुलिस से सवाल, पारदर्शिता और कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर किया
मीडिया कनेक्ट केस को राज्य स्तर का मुद्दा बनाया
न्यायिक प्रक्रिया रिमांड–परेड–न्यायिक अभिरक्षा तक निगरानी
समाज में संदेश बेटियों की सुरक्षा पर व्यापक जागरूकता
⭐ छैल बिहारी किराड़ — सच्चा समाज का सिपाही
छैल बिहारी किराड़ सिर्फ नेता नहीं,
एक सच्चे समाजसेवी, दबे-कुचलों के रक्षक और बेटियों की सुरक्षा के प्रहरी हैं।
उनकी मौजूदगी समाज को यह भरोसा दिलाती है कि—
> “जब न्याय की लड़ाई की बात आती है,
छैल बिहारी किराड़ पीछे नहीं, सबसे आगे खड़े होते हैं।”
यही कारण है कि समाज को ऐसे सिपाही की जरूरत हमेशा रहेगी।